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शिरीष बाबू के प्रगतिशील विचारों का संक्षेप में वर्णन कीजिए।

Sara Akash Upanyas Siris babu ka pragati shil bichar


उत्तर

शिरीष बाबू आंख बंद फरकै भारतीय संस्कृति का अनुकम्पा करने का विरोध करते हैँ । उनका मानना है कि पयिचमी सभ्यता मॅ जो अच्छाइयाँ हैं, क्यों उनको भी अपनाना चाहिए । वह हिन्दुआँ कै बाहा आडम्बरों का विराध काते हैं और ईसाई धर्म की प्रशंसा करते हुए कहते हैं कि ईसाइयों को लोग चाहे कितनी गालियाँ देते हैँ कि वे लोगों का धर्म परिबर्तन कराते हैँ मगर ईसाई धर्मं ही एक ऐमा धर्म है जिसके अनुयायी अनजाने लोगों कै बीच में लाखों मुसीबतें सल्फर जाते हैं, स्कूल खोलते हैँ, अस्पताल खोलते हैँ और अपना पूरा जीवन धर्म कै नाम पर समर्पित कर देते हैँ ।

वह स्री पर होने वाले अत्याचारों का विरोध करते हैँ और यह मानते हैं कि संयुक्त परिचार में व्यक्तित्व का बिकास नहीं होता, इसलिए इस परम्परा को समाप्त कर देना चाहिए । वह विवाह जैसी संस्था में विश्वास रखते हैं, परन्तु स्तियों पर होने वाले अत्याचारों से दुखी होकर तलाक का समर्थन करते हैं । वह पुराणों क्रो इतिहास नहीं मानते । धर्मग्रंथों कं प्रति भी उनकै मन में श्रद्धा नहीं है ।

अत: सार रूप में यह कहा जा सकता है कि उप्त समय कै रूढिवादी और परंपरावादी समाज में शिरीष बाबू प्रगतिशील विचारधारा वाले व्यक्ति हैं, जो समाज में परिवर्त्तन लाना चाहते हैं ।


ISC Sara Akash Notes

Dipendu Das

Dipendu Das

Author of Resonating Voices and Resounding Minds. A writer, poet, blogger and web developer. Administrator and Founder of ExamsTopper. Alumnus of Stepping Stone Model School, Alipurduar. Currently pursuing BA. LLB. (Hons.) at the prestigious NLU National University of Study and Research in Law (NUSRL), Ranchi. His work has been published in more than 21 nations around the globe.

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