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समर की भाभी के मन में प्रभा के प्रति ईंष्यर्रे का भाव हैँ । इस कथन की पुष्टि कीजिए ।

Sara Akash Upanyas Mai Samar ke Babhi Prabha ke Prati Irsha ke Vab


उत्तर

विवाह कै बाद जब प्रभा घर आईं तो पहले तो समर की भाभी ने ऊपरी मन रपे बहुत खुशी जताई, परन्तु प्रभा कै प्रति अन्दर ही अन्दर ईंष्यर्र और द्वेष की भावना उनकै मन में ज़न्म लेने लगी । तभी तो समर और प्रभा वो बीच मनमुटाव है, यह जानकर भाभी की ईष्यर्र इन शब्दों में प्रकट होने लगती है — प्रभा में थोडा सा अपनी पढाई और खूबभुरती को लेकर गुमान है । मुझसे पूछो तो कोई ऐसी परीजादी भी नहीं है तथा हमें तो बात करने लायक भी नहीं मानती । कोई आए कोई जाए न चूँघट न पल्ला । बस किताब ले आईं है अपने घर रपे सो उसे ही पढती रहती है और तो कुछ लाई नहीं है । यही नहीं प्रभा कै प्रति द्वेष की भावना ऱखने कै कारण समर को भाभी प्रभा की बुराई करने और उसे नीचा दिखाने का कोई भी मौका नहीं छोड़ना चाहती और जब मौका मिलता है । तभी प्रभा की सुन्दरता और पढाई को निशाना बनाकर कहती हैँ-चाहे जितना पढ़ लो, चाहे जितनी सुरग की परी बन लो, काम तो वही करना पड़ेगा ।

इसी प्रकार जब मौहल्ले को औरतें प्रभा की मुँह दिखाई करने आती हैं तब भी प्रभा क्री सुन्दरता और उसकी सुघड़ता की तारीफ करती हैं तो भाभी जल भुन जाती हैं।

भाभी की यही जातें प्रभा वो प्रति उनकी ईंष्यर्र और द्वेष की भावना को प्रकट करती हैँ ।


ISC Sara Akash Notes

Dipendu Das

Dipendu Das

Author of Resonating Voices and Resounding Minds. A writer, poet, blogger and web developer. Administrator and Founder of ExamsTopper. Alumnus of Stepping Stone Model School, Alipurduar. Currently pursuing BA. LLB. (Hons.) at the prestigious NLU National University of Study and Research in Law (NUSRL), Ranchi. His work has been published in more than 21 nations around the globe.

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