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‘सारा आकाश’ उपन्यास में कितने खण्ड और कितने अंक हैं? उल्लेख कीजिए ।

Sara Akash Upanyas Mai Kitne Khand Hai Aur Kintne Ang Hai


उत्तर

‘सारा आकाश’ उपन्यास को उपन्यासकार ने दो खपर्डों में विभाजित किया है— (क) पूर्वार्द्ध (सांझ ) अर्थात् बिना उत्तर वाली दस दिशाएँ और (ख) उत्तरार्द्ध ( सुबह ) ।

पूर्वार्द्ध में उपन्यासकार ने दस अंकों क्रो रखा हैँ जिनमें समर कै विवाह से लेकर, पत्नी से वात न करने , उससे दुर्व्यवहार करने और फिर सारी स्थिति साफ हो जाने पर समर कै पश्चगताप तक की कहानी कही गई है । जबकि उत्तरार्द्ध में समर और प्रभा में सामंजस्य, समर की शिरीष वाबूसे भेंट, उनकै विचारों से प्रेरणा लेना, समर कौ नौकरी लगना और छुट जाना तथा अन्त में उसकी निराशा की कथा को दस अंकों में प्रस्तुत किया गया है । इस प्रकार उपन्यास में दो खण्ड और प्रत्येक खण्ड में दस-दस अंक हैं ।


ISC Sara Akash

Dipendu Das

Dipendu Das

Author of Resonating Voices and Resounding Minds. A writer, poet, blogger and web developer. Administrator and Founder of ExamsTopper. Alumnus of Stepping Stone Model School, Alipurduar. Currently pursuing BA. LLB. (Hons.) at the prestigious NLU National University of Study and Research in Law (NUSRL), Ranchi. His work has been published in more than 21 nations around the globe.

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