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‘सारा आकाश’ उपन्यास में समर की अम्माजी का चरित्र क्या एक पारम्परिक भारतीय सास का है ? स्पष्ट कीजिए।

Sara Akash Upanyas Mai Amma Ji Main Ek Bhartiya Shas Ka Charitra


उत्तर

‘सारा आकाश’ में अम्मा जी दो बहुओं की सास हैं । उनमें एक लेउ भारतीय सास कै सभी गुण मौजूद हैं । जैसे हर भारतीय परिवार में बेटे की माँ को बहूकौ चाह होती है । अम्मा जी भी यही चाहती हैं और कहती हैं कि वह कौंन-सा दिन होगा जब देहली पर छोटी बहूका पैर पडेगा, परन्तु विवाह होते ही यह चाहना बदल जाती है और कभी बहू को कम दहेज लाने और कभी बरातियों की खातिरदारी न होने कै ताने सुनाए जाते हैं । प्रभा ने जब ससुराल में पहली बार खाना ‘ बनाया और जलन कै कारण भाभी ने चुपकै से दाल में ज्यादा नमक डाल दिया  तब अम्माजी ने उसे बहुत खरी-खोमी सुनाईं । इसी प्रकार जब प्रभा ने मिट्टी कै गणेशजी को मिट्टी का ढेला समझकर उससे बर्तन माँज दिए तब भी अम्मा जी ने विकराल रूप धारण कर लिया और प्रभा का जली कटी सुनाने लगीं । एक दिन काम की जल्दी में प्रभा से दूध फैल गया । तब भी अम्मा जी एक सास के तेवर दिखाते हुए बोलीं — “उसकी गाँठ से क्या जाता है ? उसका बाप तो भूरी भैंस बँध वा गया है न । सो रोज…कभी दूध फैल रहा३है, कभी उफान आ रहा है । अन्धी हो गयी हैँ । चलेगी तो कभी यह तोढ़ तो कभी यह फोड़ ।”

इसकै अतिरिक्त उपन्यास में अन्य कईं स्थानों पर भी समर को अम्माजी प्रभा कै साथ पारम्परिक सास को तरह ही व्यवहार करती हैं और जब वह गुस्से में होती हैं तो आगा पोछा कुछ नहीं देखतीं और जो भी मन में आता है बिना सोचे समझे बोल देती हैं ।


ISC Sara Akash

Dipendu Das

Dipendu Das

Author of Resonating Voices and Resounding Minds. A writer, poet, blogger and web developer. Administrator and Founder of ExamsTopper. Alumnus of Stepping Stone Model School, Alipurduar. Currently pursuing BA. LLB. (Hons.) at the prestigious NLU National University of Study and Research in Law (NUSRL), Ranchi. His work has been published in more than 21 nations around the globe.

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