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गलती से मिट्टी के गणेशजी को ढेला समझकर उससे बर्तन माँज लेने पर समर ने प्रभा दो साथ कैसा व्यवहार किया ?


उत्तर

समर को भाभी कौ पुत्री के नामकरण संस्कार के मौके पर पंडितजी ने मिट्टी के गणेशजी बनाए और उनकी पूजा की । शाम को गलती से प्रभा ने मिट्ठी कै उन गणेशजी क्रो मिट्टी का ढेला समझकर उससे जूठे बर्तन माँज दिए । इस पर अम्माजी और भाभी ने पूरा घर सिर पर उठा लिया । जब समर घर लौटा तो भाभी ने और जोरं-जोर से बोलना शुरू कर दिमा—” कुछ हो गया तो इसका क्या जाएगा ? यह तो अपने हाथ झाड़कर अलग हो जाएगी । है भगवान तूदेखने चाला है सबको । समझना । दुनियां कुढ़-कुढ़ कर मरी जाती है । हाय-राम ! ” भाभी को यह बड़बड़रहट सुनकर समर का गुस्सा सातवें आसमान पर पहुँच गया और वह दाँत र्थीचता हुआ सीधे प्रभा कै सामने पहुँच गया और पूरी ताकत से प्रभा कै गाल पर एक चाँटा जड़ दिया जिससे प्रभा कं गाल पर समर की पाँचों उँगलियाँ उभर आईं । वह संभल नहीं पाईं और जमीन पर बैठ गई । तब समर ने उसे गाली देते हुए कहा यहॉ रहना हो तो ठीक से रहो, नहीं तो जहाँ जगह दीखे अभी चली जाओ । बडी नास्तिक की बच्ची बनी है ।

इस प्रकार एक छोटी-सी घटना कों इतना बढा दिया गया कि प्रभा को समर  कै दुर्व्यवहार का शिकार होना पडा ।


ISC Sara Akash Notes

Dipendu Das

Dipendu Das

Author of Resonating Voices and Resounding Minds. A writer, poet, blogger and web developer. Administrator and Founder of ExamsTopper. Alumnus of Stepping Stone Model School, Alipurduar. Currently pursuing BA. LLB. (Hons.) at the prestigious NLU National University of Study and Research in Law (NUSRL), Ranchi. His work has been published in more than 21 nations around the globe.

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